विनोद दत्त, Guest Column

रामजी कई गया था

एक हास्य कविता मालवी भाषा में... छोरो बी.ए. कई भण्यो आसमान पे दिमाग जई रियो है माथा पे धुप पड़ी री खून पसीनो एक करी ने बाप खेत में हल चलई रियो है ,बाई बापड़ी बोवणी करी री ने देखो - बेटो इंग्लिश गाने गाई रियो है के - "माय हार्ट इस बीटिंग ने क्यूँ… Continue reading रामजी कई गया था