Emotions, Inspirational, Poems

इतना भी ज़रूरी नहीं ये सब। .

जब मन हो तब ज़रा मुस्कुरा लो |
और कभी लगे भारी सा…
तो आँसू बहा लो ।
कोई कुछ सोचेगा यह ना सोचो अब,
इतना भी ज़रूरी नहीं यह सब ॥

मन हो तब थोड़ा गुनगुना लो,
मन हो तब खुद को संवार लो ।
जो काम करते हुए दिख जाए बगिया,
तो कुछ पल निकाल कर,
उसे भी निखार लो ।
उसे भी ज़रूरत है तुम्हारी,
और तुम्हें भी पता है,
इन फूल पत्तो की हंसी का मतलब |

इतना भी ज़रूरी नहीं है यह सब ….

मन होता ही है जज़्बातो से भरा ।
कभी मुस्कुरा दिया ,
कभी रो लिया ज़रा |
इसमें कुछ बुरायी नहीं है,
तुम्हारे भावना तुम्हारी ही है,
परायी नहीं है |
जो नहीं स्वीकारा इसे तो, जाएँगी कहाँ ,
जहाँ कदर नहीं, बरस जाएगी वहाँ |
अपना लो इन्हे और वक्त दो ज़रा ,
जब जब यह पुकारे, तब तब
कौन क्या कहेगा…. इतना भी ज़रूरी नहीं है यह सब ।
सच में .. बिलकुल भी ज़रूरी नहीं है यह सब ||

3 thoughts on “इतना भी ज़रूरी नहीं ये सब। .”

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