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हल्दी वाला दूध

मैं रोज़ रात को हल्दी दूध पीकर सोती हूँ. सर्दियों और बरसात में यह बहुत फायदा तो करता ही है साथ में शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ाता है. हल्दी में औषधीय गुण है इसलिए समय समय पर यह रोग उपचार के काम भी आती है
आपको लगेगा की यह बात में क्यों सबको बता रही हूँ यह तो सबको पता है और सब इसका सेवन करते भी है।

कुछ दिन पहले घर लौटते समय मेरे गाड़ी से चोट लग गयी. खून भी बहा और छोटा सा घाव भी होगया। बारिश के मौसम में संक्रमण को खुला आमंत्रण देने जैसा था यह छोटा सा घाव. अब हो गया सो हो गया क्या करें। डॉक्टर के क्लिनिक गयी वहाँ उन्होंने मरहम पट्टी। कुछ दवाइयां दी जिससे घाव जल्दी भर जाये और दर्द व थकान न लगे.

इन सब में, २ घंटे लग गए. बाजार जाने का विचार छोड़ा और बिना दूध और सब्ज़ी ख़रीदे में घर पहुंची खाना खाकर दवाई ली और सो गयी. दवाई और थकान की वजह से बहुत जल्दी गहरी नींद आ गयी।
अगले दिन सुबह घर से फ़ोन आ गया, तबियत और हाल चाल पूछने के लिए, सब चिंतित जो थे.अचानक माँ ने कहा , हल्दी दूध तो पिया था न कल. सुनते ही ध्यान आया कि हाँ कल दूध सब्ज़ी कुछ नही लायी। उन्होंने थोड़ी लताड़ लगायी और बोली की वैसे तो रात में फायदा करता है पर कोई बात नहीं अब पी लेना।

उनकी बात सुनकर सामने वाली डेयरी से दूध मंगाया और हल्दी मिलाकर ले भी लिया पर एक विचार आया कि यूँ तो में रोज़ इसका सेवन करती हूँ जब अमूनन शरीर स्वस्थ ही रहता है। और कल जब इसकी अतिरिक्त आवयश्कता थी तब इसे भूल गयी। आज जब गर्म दूध में हल्दी मिलाकर सेवन किया तो पूरे शरीर को आराम मिला। यह सिर्फ मेरा विचारात्मक आराम नहीं था, मैं सच में आराम महसूस कर रही थी।
ज़िन्दगी नाम की इस क्लास में हम रोज़ नई सीख़ की बातें पढ़ते है, कुछ समझते है कुछ सर से ऊपर से निकल जाती है कुछ पर विश्वास तो होता है पर अनुभव नहीं होता।

कुछ बातें तब समझ आती है जब हमे इनकी ज़रूरत पढ़ती है। उदहारण के तौर पर, हमे यह सिखाया जाता है, कि चोरी नहीं करनी चाहिए। बिलकुल सही बात है, दूसरो की कोई भी वस्तु ,धन,श्रेय बिना उनकी अनुमति के चुपचाप लेना चोरी ही है, उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
अब जब आप बहुत अमीर है, आपने पास आपकी ज़रूरत का हर सामान है, और प्रचुर मात्रा में धन भी है. तब आप इस सीख को आसानी से मान लेंगे। पर ज़रा सोचिये कभी आपके पास यह सब नहीं हुआ और तब इन सब की ज़रूरत हुई तो…
मान लीजिये ..आप अनजान शहर में गए और आपका धन ,मोबाइल सब कुछ ,कुछ देर के लिए खो गया। आप किसी को नहीं जानते और कोई आप को नहीं जानता ,भूख के मारे आपकी जान निकल रही है,और सामने एक व्यक्ति के पास बहुत बड़ा पैकेट रखा है जिसमे बहुत सारे बिस्किट, इतने कि आप यदि ५-६ बिस्किट ले भी ले तो उसे पता नहीं चलेगा। अब. ….
आप क्या करेंगे। “चोरी नहीं करनी चाहिए” यह सीख अपनी पांचवी कक्षा में पढ़ी थी. इस सीख की असली परीक्षा आज है , इतने में ही वह आदमी आप पास आता है और कहता है की भाईसाहब में ५ मिनट में आता हूँ क्या आप मेरे सामान का ध्यान रखेंगे , आप भले लग रहे है इसलिए आप पर सहज विश्वास हो चला है…
अब आप और भी दुविधा में पड़ गए कि कहाँ मैं इसके सामान में चोरी की नियत रख रहा था और यह मुझे विश्वासपात्र समझ रहा है। अब आपको एक और सीख याद आ गयी “किसी का विश्वास नहीं तोडना चाहिए” तय कर लिया मन ने की भले आज उपवास करना पड़े पर इसके बिस्कुट का एक दाना भी बिना इससे पूछे नहीं खाऊंगा।
आप सोचने लगे की क्या करुँ, इतने में भागता हुआ एक आदमी आया और ५-६ बड़े डिब्बे उठाकर भागने लगा.इस पर उन डिब्बों का मालिक ने दूर गश्त पर खड़े पुलिस को आवाज़ लगाई और पुलिस की मदद से उस चोर से सब डिब्बे वापिस ले लिए ,उस डिब्बे के मालिक का कहना था कि यह डिब्बे किसी और के है यदि उस तक नहीं पहुंचाए तो इस की कीमत उसके वेतन में से कटेगी इसलिए वह चाहकर भी यह किसी को नहीं दे सकता था.
खैर अब वो चोर पुलिस के पास था. आपके पेट की जठराग्नि अब स्वतः शांत हो चुकी थी। कारण मत पूछियेगा क्योंकि आपका पेट अब भी खाली ही था। यदि विश्वास बनाये रखने की बात आपके अंदर नहीं आयी होती तो पोलिस की गिरफ़्त में उस चोर की जगह आप खुद हो सकते थे। चोरी करना बुरी बात है इस सीख का भी आपके पुलिस की गिरफ्त में न होने में बराबर का योगदान था. लेकिन भूख का अहसास कैसे चला गया।
इसका जवाब है स्वीकृति, आपके मन ने मान लिया है कि कारण कुछ भी हो यह बिस्किट आपको नहीं खाने।
आप परीक्षा में पास हुए। इस सीख की ज़रूरत आपको इतने सालो से नहीं पड़ी, इसकी ज़रूरत आपको आज पड़ी और अपने इस सीख का पूरा सदुपयोग किया .

कुछ बातें हमे तब ही समझ आती है जब हम उनका अनुभव करते है. कुछ बातों का महत्व भी हम तब ही समझते है जब जीवन में हमें इनकी ज़रूरत पड़ती है। रोज़ इन्हे बोलने से बेशक हमें इन्हे याद रख पाते है हमारे अंतर्मन में अच्छी तरह से बैठ जाती है और ज़रूरत के समय हमारे कर्म में प्रत्यक्ष होकर हमें मुसीबत से निकाल लेती है या कई बार मुसीबत तक पहुंचने ही नहीं देती.

बिलकुल हल्दी वाले दूध की तरह। रोज़ इसके सेवन से यूं भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ चुकी थी पर चोट लगने पर पीने से इसने न सिर्फ मुझे आराम दिया बल्कि ज़ख्म जल्दी भरने में भी मदद की।
अगले दिन में फिर से निकल पड़ी गाड़ी लेकर अपने कर्मपथ की ओर। .
इसलिए आप भी देखिये आप के जीवन वह सीख, वह बातें जो किसी हल्दी वाले दूध से कम नहीं है।

4 thoughts on “हल्दी वाला दूध”

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