Bitter Truth, Inspirational

धरती सी नारी

जन्म देने वाली का भी, जन्म कभी हुआ होगा
सृजन करने वाली का भी, सृजन कभी हुआ होगा
जो इतनी महत्ता रखती है उसे अपने लिए लड़ना होगा,
ऐसा उसने कभी सोचा न होगा।।

पोषित करने वाली को भी पोषण चाहिए,
अन्नपूर्णा को भी अन्न चाहिए,
जो समझें सबके मन को,
समझे कोई उसे भी,ऐसा मन चाहिए।।
हक़ है जिसपर,उसे पाने के लिए भी लड़ना होगा, ऐसा उसने कभी सोचा न होगा।।

बाँटती रहे वो अपने हिस्से की भी खुशियां,
लेकिन अपने हिस्से की खुशी उसे मिले कहाँ से,|
बेफ़िक्री में बैठे हैं कि, वो तो आयी है किसी चमत्कारी जहाँ से|
कुछ ना देकर हम बस पाने की उम्मीद रखते है |
स्वार्थी है हम बस स्वहित देखते है।|

भूल जाते है हम,
कि वो रूठने पर भगवान को भी मना सकती है।
ज़रूरत ही क्या उसे किसी से कुछ भी पाने की,
जो जीवन बना सकती है, वो सब कुछ बना सकती है।।

4 thoughts on “धरती सी नारी”

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