विनोद दत्त, Guest Column

रामजी कई गया था

एक हास्य कविता मालवी भाषा में…

छोरो बी.ए. कई भण्यो
आसमान पे दिमाग जई रियो है

माथा पे धुप पड़ी री
खून पसीनो एक करी ने
बाप खेत में हल चलई रियो है ,
बाई बापड़ी बोवणी करी री
ने देखो – बेटो इंग्लिश गाने गाई रियो है
के – “माय हार्ट इस बीटिंग
ने क्यूँ लव इस फिटिंग।”

बी.ए. पास होग्यो बेटो
पण दो साल से
बाप री कमई खाई रियो है
माँ ने मारे ताना ने
छोटा भई – बेन ने
फ़ोकट डराई रियो है।

पड़ोस रा सीताराम री छोरी री
वार्षिक री परीक्षा है
तो आजकल विणे
इंग्लिश भणाई रियो है

सीताराम जाने
चलो म्हारी ढब्बू छोरी ने
यो इंग्लिश सिखाई रियो है
पण ऊ कई जाणे मूरख
कि यो तो छोरी ने
‘आई लव यू’ रो मतलब
समझाई रियो है
और छोरी बी कम माया नी
वा बी छाने – छाने
इसक लड़ावे है
दन भर में चार बार डिरेस बदले
मेक अप करे
हेमा मालिनी सा नखरा दिखावे है
ने गावे है –
थारा बिण भी कई जीणो , ओ साथी रे…

अबे कई करे छोरा रो बाप
ने कई करे सीताराम
यो तो रामजी ज सियाजी कई गया था के –
एसो कलजुग आएगो
हंस चुगेगो दाणो दूण को
ने कौवो मोती खाएगो…

— विनोद दत्त (10 -01 -1980)

2 thoughts on “रामजी कई गया था”

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